तारिक रहमान की वतन वापसी: बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल, क्या भारत-बांग्लादेश रिश्तों की दिशा बदलेगी?
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की संभावित वतन वापसी को लेकर दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वर्षों से लंदन में निर्वासन जैसा जीवन बिता रहे तारिक रहमान की वापसी केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके दूरगामी असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकते हैं।
तारिक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं और बांग्लादेश की विपक्षी राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे समय में जब शेख हसीना सरकार के खिलाफ विपक्षी एकजुटता बढ़ रही है, तारिक की वापसी BNP के लिए नई ऊर्जा का काम कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी मौजूदगी से आगामी चुनावों में सत्ता संघर्ष और तेज होगा।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर
भारत के लिए तारिक रहमान का नाम हमेशा संवेदनशील रहा है। उनके कार्यकाल और प्रभाव के दौर में भारत-विरोधी तत्वों को कथित तौर पर संरक्षण मिलने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में यदि भविष्य में BNP सत्ता में आती है या राजनीतिक रूप से मजबूत होती है, तो सीमा सुरक्षा, आतंकवाद, अवैध घुसपैठ और द्विपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय हालात में बांग्लादेश की कोई भी सरकार भारत के साथ संबंध पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकती। आर्थिक सहयोग, व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा जैसे मुद्दे दोनों देशों को आपस में जोड़ते हैं।
राजनीतिक संकेत और भविष्य की तस्वीर
तारिक रहमान की वतन वापसी को बांग्लादेश में लोकतांत्रिक राजनीति के नए अध्याय के रूप में भी देखा जा रहा है। यह वापसी जहां BNP समर्थकों के लिए उम्मीद की किरण है, वहीं सत्तारूढ़ अवामी लीग के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
कुल मिलाकर, तारिक रहमान की वापसी केवल एक नेता की घर वापसी नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों की भविष्य की दिशा तय करने वाला अहम घटनाक्रम साबित हो सकती है। आने वाले महीनों में इस कदम के असर क्षेत्रीय राजनीति में साफ तौर पर नजर आने की संभावना है।