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तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी से ISRO का मिशन फेल, 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में गुम; 8 महीने में दूसरी बड़ी असफलता

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक और महत्वाकांक्षी रॉकेट लॉन्च मिशन तकनीकी खामी के कारण असफल हो गया। मिशन के दौरान रॉकेट के तीसरे चरण (थर्ड स्टेज) में आई गंभीर गड़बड़ी के चलते रॉकेट अपने निर्धारित पथ से भटक गया, जिससे उसमें लगे 16 उपग्रह (सैटेलाइट) अंतरिक्ष में गुम हो गए। यह बीते 8 महीनों में दूसरी बार है जब ISRO को इस तरह की असफलता का सामना करना पड़ा है।

ISRO के अधिकारियों के अनुसार, लॉन्च के पहले और दूसरे चरण तक रॉकेट की उड़ान सामान्य रही। लेकिन जैसे ही तीसरे चरण की शुरुआत हुई, प्रोपल्शन सिस्टम में असामान्य दबाव और थ्रस्ट में गिरावट दर्ज की गई। इसके कारण रॉकेट को आवश्यक वेग और ऊंचाई नहीं मिल सकी और वह तय कक्षा (ऑर्बिट) में सैटेलाइट स्थापित करने में असफल रहा।

बताया जा रहा है कि तीसरे चरण का काम रॉकेट को अंतिम गति प्रदान कर सैटेलाइट्स को सही कक्षा में स्थापित करना होता है। इसी चरण में आई तकनीकी खराबी ने पूरे मिशन को प्रभावित किया। संपर्क टूटने के बाद सैटेलाइट्स की ट्रैकिंग संभव नहीं हो सकी और उन्हें “मिशन लॉस्ट” घोषित करना पड़ा।

ISRO प्रमुख ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह संगठन के लिए एक गंभीर लेकिन सीख देने वाला क्षण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक विश्लेषण में तकनीकी कारणों की पहचान की जा रही है और एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जो जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी करीब 8 महीने पहले ISRO के एक अन्य मिशन में तकनीकी खामी सामने आई थी। लगातार दूसरी असफलता ने देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष विज्ञान में असफलताएं अनुसंधान का हिस्सा होती हैं और ISRO पहले भी कई बार मजबूत वापसी कर चुका है।

ISRO ने भरोसा दिलाया है कि इस मिशन से मिले अनुभवों के आधार पर आने वाले प्रोजेक्ट्स में तकनीकी सुधार किए जाएंगे और भारत का अंतरिक्ष अभियान पहले से अधिक मजबूत होकर आगे बढ़ेगा।