इतिहास में नहीं, समाज के वर्तमान में बदलाव चाहता है RSS” — मोहन भागवत का बड़ा संदेश
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ का उद्देश्य इतिहास की किताबों में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करवाना नहीं है, बल्कि वर्तमान समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उनका यह बयान उस सोच को दर्शाता है, जिसमें कार्य की प्राथमिकता प्रचार या प्रसिद्धि नहीं, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण है।
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि संघ हमेशा से ही “काम बोलता है” की नीति पर चलता रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कोई संगठन केवल अपने नाम को इतिहास में दर्ज कराने के लिए काम करता है, तो वह अपने मूल उद्देश्य से भटक सकता है। RSS का लक्ष्य केवल इतिहास में अपनी छवि बनाना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुंचकर उनके जीवन में सुधार लाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि संघ के स्वयंसेवक बिना किसी व्यक्तिगत लाभ या प्रसिद्धि की इच्छा के कार्य करते हैं। उनका मानना है कि सच्ची सेवा वही है, जिसमें कोई अपेक्षा न हो और जो पूरी निष्ठा के साथ समाज के हित में की जाए। संघ के कार्यकर्ता देश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहे हैं, लेकिन वे इन कार्यों का प्रचार-प्रसार करने से अधिक उसके प्रभाव पर ध्यान देते हैं।
भागवत ने आगे कहा कि इतिहास में नाम दर्ज होना या न होना महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि वर्तमान समय में समाज को क्या दिया जा रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए किस प्रकार का वातावरण तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर समाज मजबूत और संगठित होगा, तो राष्ट्र अपने आप सशक्त बन जाएगा।
अपने भाषण में उन्होंने युवाओं को भी विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के युवा वर्ग को केवल सफलता और प्रसिद्धि के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को समझते हुए समाज के लिए कुछ करने की भावना रखनी चाहिए। यही भावना उन्हें एक सच्चा नागरिक बनाएगी और देश के विकास में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बनाएगी।
मोहन भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा या दिखावे में विश्वास नहीं रखता। उनका मानना है कि जो काम ईमानदारी और समर्पण के साथ किया जाता है, उसका परिणाम अपने आप सामने आता है। इसलिए संघ का ध्यान केवल अपने कार्यों को सही दिशा में आगे बढ़ाने पर है, न कि अपनी छवि को चमकाने पर।
अंत में, उन्होंने कहा कि अगर किसी संगठन का लक्ष्य केवल प्रसिद्धि पाना हो, तो वह स्थायी परिवर्तन नहीं ला सकता। स्थायी बदलाव के लिए निस्वार्थ भाव, धैर्य और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। RSS इसी सिद्धांत पर चलते हुए समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभा रहा है।