जद(यू) को बड़ा झटका - पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा राजद में शामिल हो सकते हैं
संतोष कुशवाहा पूर्णिया के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं, जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में जनता दल (यूनाइटेड) के टिकट पर जीत दर्ज की थी। उनकी गिनती नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में होती थी। हालांकि, पिछले कुछ समय से ऐसी खबरें आ रही थीं कि वे पार्टी के नेतृत्व से नाराज चल रहे थे और उन्हें संगठन में अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी जदयू की ओर से उन्हें टिकट दिया गया था, लेकिन वह निर्दलीय उम्मीदवार पप्पू यादव से हार गए थे।
राजद में शामिल होने का कारण
कुशवाहा के राजद में शामिल होने के पीछे कई प्रमुख कारण माने जा रहे हैं:
- पार्टी में उपेक्षा: संतोष कुशवाहा का आरोप था कि उन्हें जदयू में दरकिनार किया जा रहा था, जिससे वे असंतुष्ट थे।
- राजनीतिक भविष्य: आगामी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया। राजद, जो कि बिहार में मुख्य विपक्षी दल है, उन्हें एक बेहतर मंच प्रदान कर सकता है।
- सामाजिक समीकरण: राजद प्रमुख तेजस्वी यादव कुशवाहा जाति के वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं, और संतोष कुशवाहा जैसे बड़े नेता का उनके साथ आना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजनीतिक प्रभाव
इस घटनाक्रम के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं:
- जदयू को झटका: चुनाव से ठीक पहले एक बड़े नेता का पार्टी छोड़कर जाना जदयू के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। खासकर सीमांचल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में, जहां कुशवाहा का मजबूत जनाधार है।
- राजद को मजबूती: संतोष कुशवाहा के आने से राजद को सीमांचल, खासकर पूर्णिया, किशनगंज और अररिया जैसे जिलों में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी।
- बदलता समीकरण: यह घटना बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। कुशवाहा का जाना जदयू के लिए एक चुनौती होगी, जबकि राजद के लिए यह एक अवसर है।