मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार
ओस्लो, 10 अक्टूबर 2025 — नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने अपनी बैठक में मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado) को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की है। इस सम्मान के माध्यम से समिति ने वेनेज़ुएला की इस विपक्षी नेता की लोकतंत्र की रक्षा और मानवाधिकारों की लड़ाई को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दी है, विशेष रूप से जब वे अपने देश में लगातार राजनीतिक दमन एवं चुनौतियों का सामना करती रही हैं।
नोबेल समिति का विचार और चुनौतियाँ
नोबेल शांति पुरस्कार हमेशा उन व्यक्तियों या संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने “राष्ट्रों के बीच मैत्री बढ़ाने, स्थायी शांति स्थापित करने, युद्धों को कम करने या खत्म करने” जैसे आदर्शों की दिशा में उल्लेखनीय काम किया हो। इस वर्ष की समिति ने मचाडो को ऐसे समय में सम्मानित किया, जब दुनिया भर में लोकतंत्र पर दबाव और सत्ता केंद्रीकरण के खतरे बढ़े हुए हैं।
मचाडो की पहचान वेनेज़ुएला में एक साहसी राजनीतिज्ञ के रूप में हुई, जिन्होंने लगातार सरकार विरोधी गतिविधियों, मतपत्रों की निष्पक्षता की मांग और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। उन्हें सार्वजनिक पदों पर जाने से निषिद्ध कर दिया गया, कई बार हिरासत और प्रताडना झेला, लेकिन उन्होंने अपनी लड़ाई नहीं छोड़ी। नोबेल समिति की टिप्पणी में कहा गया कि “लोकतंत्र एक पूर्व शर्त है शांति के लिए” और उन्होंने मचाडो को उस प्रतीक के रूप में देखा, जो निरंकुश ताकतों के खिलाफ लड़ी।
इस पुरस्कार से यह भी संकेत मिलता है कि नोबेल समिति उन संघर्षों को भी महत्व देता है जो प्रत्यक्ष युद्ध नहीं बल्कि राजनीतिक दमन, अभिव्यक्ति की आज़ादी की बाधाएँ, और स्वशासन के अधिकारों पर हमले से जुड़ी हों।
वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव लोकतंत्र और दबाव
मचाडो को यह सम्मान मिलना दुनिया भर में लोकतंत्र के लिए प्रेरणा है — खासकर उन देशों में जहाँ सत्ता का केंद्रीकरण और अभिव्यक्ति पर दमन बढ़ रहा है। यह पुरस्कार संघर्षरत नेताओं को यह दिखाता है कि उनकी आवाज़ सुनी जा सकती है और दुनिया उनकी चुनौतियों से अवगत है।
वेनेज़ुएला की सरकार पर इससे दबाव बढ़ने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मीडिया इस फैसले को दबाव बढ़ाने के एक माध्यम के रूप में देख सकते हैं कि देश में लोकतांत्रिक सुधार हो।
इस पुरस्कार से अन्य राष्ट्रों में भी लोकतंत्र समर्थक आंदोलन, मानवाधिकार कार्यकर्ता और सामाजिक न्याय की लड़ाई को बढ़ावा मिल सकता है। यह संकेत देता है कि केवल युद्ध रुकाव या विश्वसंधारण से ही शांति नहीं आती — बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता, जनता की भागीदारी और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा से भी शांति कायम होती है।
उम्मीदवारों का परिदृश्य
इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 338 नामांकन प्राप्त हुए थे, जिनमें 244 व्यक्ति और 94 संस्थाएँ थीं। समिति सदस्यों, पूर्व राष्ट्रपति, सांसद और शोधार्थी इस प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं। नॉर्वेजियन नोबेल समिति के नियमों के अनुसार, नामांकन की पुष्टि या अस्वीकृति 50 वर्ष तक गोपनीय रखी जाती है। अर्थात् हम नहीं जानते कि मचाडो के अलावा कौन-कौन नामांकन भेजा गया था।यह पुरस्कार वेनेज़ुएला जैसे देशों को यह संदेश देता है कि संघर्षों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आवाज़ मिल सकती है।