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भूमध्य सागर में भारत की नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन — तुर्की के निकट भारतीय युद्धपोतों की तैनाती, कॉकस सहयोगी देशों ने दिया समर्थन

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2025  भारत की सामरिक और नौसैनिक सक्रियता अब केवल हिंद महासागर तक सीमित नहीं रही है। तुर्की के तट के निकट भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने अपने युद्धपोतों की रणनीतिक तैनाती की है। यह कदम भारत की बढ़ती वैश्विक सुरक्षा भूमिका और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ रक्षा संबंधों को मज़बूत करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना ने भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जहां भारत के दो युद्धपोत और एक आपूर्ति पोत को तैनात किया गया है। यह तैनाती मुख्यतः समुद्री सुरक्षा अभ्यासों, नौवहन स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) और आतंकरोधी अभियानों में भागीदारी के उद्देश्य से की गई है।

कूटनीतिक सूत्रों ने बताया कि यह अभियान भारत की "Act East" और "Extended Neighborhood" नीतियों के विस्तार का हिस्सा है, जिसमें भारत अब यूरोप और पश्चिम एशिया तक अपने रक्षा सहयोग का दायरा बढ़ा रहा है।

तुर्की, जो हाल के वर्षों में पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है, अब भारत के इस कदम पर करीबी नजर रखे हुए है। भारत द्वारा भूमध्य सागर में अपनी नौसेना की उपस्थिति दर्ज कराना, एक संतुलित रणनीतिक संदेश माना जा रहा है कि नई दिल्ली अपने हितों की रक्षा हर क्षेत्र में करने के लिए तत्पर है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तैनाती केवल सैन्य उपस्थिति नहीं बल्कि भारत की कूटनीतिक शक्ति का भी प्रदर्शन है।

कॉकस सहयोगियों का समर्थन

इस मिशन को आर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस जैसे देशों का पूरा समर्थन मिला है। ये सभी देश हाल के वर्षों में भारत के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।

कॉकस क्षेत्र (Caucasus) में भारत के सहयोगी देशों ने इस तैनाती को "शांति और स्थिरता के लिए सकारात्मक कदम" बताया है। आर्मेनिया ने कहा कि भारत की यह भूमिका क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में सहायक होगी।

भारतीय नौसेना ने इस अभियान के लिए अत्याधुनिक डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट क्लास के जहाज़ तैनात किए हैं। इन जहाजों में

BrahMos सुपरसोनिक मिसाइल,

एंटी-सबमरीन वारफेयर सिस्टम, और

एडवांस्ड रडार निगरानी तकनीक
से सुसज्जित हैं।

नौसेना के प्रवक्ता के अनुसार, “यह अभियान भारत की समुद्री सुरक्षा प्रतिबद्धता को दर्शाता है और सहयोगी देशों के साथ संयुक्त अभ्यासों का हिस्सा है।”

अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव

भारत की इस सक्रियता को पश्चिम एशिया और यूरोपीय देशों में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। कई विश्लेषक मानते हैं कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक वैश्विक सामरिक भागीदार के रूप में उभर रहा है।

नई दिल्ली का यह कदम यह भी दर्शाता है कि भारत अब समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षा, और आतंकरोधी अभियानों में अधिक निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।