गाज़ा में शांति का आगाज़! मिडिल ईस्ट रवाना हुए ट्रंप, बंधकों की रिहाई पर दुनिया भर की नज़र
गाज़ा पट्टी में जारी युद्ध और मानवता के संकट के बीच एक नई उम्मीद की किरण दिख रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट की यात्रा शुरू कर दी है, जिसका उद्देश्य गाज़ा में शांति स्थापित करने और बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने की दिशा में पहल करना बताया जा रहा है। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब इज़राइल और हमास के बीच तनाव अपने चरम पर है और सैकड़ों निर्दोष नागरिक अब भी बंधक बनाए गए हैं।
ट्रंप के इस दौरे पर पूरी दुनिया की नज़र टिकी हुई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप सबसे पहले सऊदी अरब और फिर इज़राइल जाएंगे, जहाँ वे शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर स्थिति पर चर्चा करेंगे। इसके बाद वे मिस्र और क़तर के अधिकारियों से भी मुलाकात कर सकते हैं, जो हमास और अन्य फिलिस्तीनी समूहों से बातचीत के लिए जाने जाते हैं।
ट्रंप ने रवाना होने से पहले कहा कि “मध्य पूर्व में शांति संभव है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों को बातचीत की मेज़ पर लाना होगा। बंधकों की सुरक्षित वापसी हमारी पहली प्राथमिकता है।” उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सकारात्मक संकेत के रूप में देखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह यात्रा अमेरिका की वैश्विक राजनीति में बढ़ती सक्रियता को भी दर्शाती है। जहां एक ओर राष्ट्रपति बाइडेन प्रशासन अभी तक मध्य पूर्व की नीति को लेकर असमंजस में दिख रहा है, वहीं ट्रंप खुद को एक निर्णायक और शांति निर्माता नेता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रयास का स्वागत करते हैं जो बंधकों की रिहाई और क्षेत्र में स्थिरता लाने में मदद कर सके। वहीं, फिलिस्तीन प्राधिकरण ने भी ट्रंप की यात्रा को “सकारात्मक पहल” बताया है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि स्थायी शांति तभी संभव है जब फिलिस्तीनी राज्य को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले और गाज़ा में मानवीय सहायता निर्बाध रूप से पहुंचाई जाए।
संयुक्त राष्ट्र ने इस यात्रा को “उम्मीद की एक छोटी सी किरण” बताया है। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि किसी भी प्रकार की बातचीत, जो हिंसा को कम करे और नागरिकों की जान बचाए, उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
गाज़ा की स्थिति अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अब तक हजारों लोग बेघर हो चुके हैं, जबकि अस्पताल और राहत शिविर अत्यधिक दबाव में हैं। मानवीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही संघर्ष विराम नहीं हुआ, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
अब सबकी निगाहें ट्रंप की इस यात्रा पर हैं — क्या वे वास्तव में शांति की कोई नई दिशा दिखा पाएंगे, या यह यात्रा भी सिर्फ एक राजनीतिक प्रयास बनकर रह जाएगी? दुनिया सांस थामे इस ऐतिहासिक कूटनीतिक पहल के नतीजों का इंतजार कर रही है।