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NDA और INDIA दोनों गठबंधन नाजुक स्थिति मे , नीतीश जी हुए ऐक्टिव !

चुनाव नजदीक आने पर भारतीय राजनीति में गठबंधनों का टूटना कोई असामान्य बात नहीं है, और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं। सीट-बंटवारे को लेकर आंतरिक कलह और छोटे दलों की नाराजगी दोनों गठबंधनों के टूटने का संभावित कारण बन सकती हैं। हालांकि, दोनों गठबंधनों ने अब तक एकजुटता बनाए रखी है, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में वे कितने समय तक साथ रहेंगे।

 एनडीए के भीतर सीट-बंटवारे को लेकर असंतोष था, खासकर चिराग पासवान (लोजपा-रा), उपेन्द्र कुशवाहा (रालोमो), और जीतन राम मांझी (हम) को आवंटित सीटों की संख्या को लेकर।

 बिहार में भाजपा का बढ़ता प्रभाव और जद (यू) का अपनी स्थिति बनाए रखने का प्रयास दोनों के बीच तनाव का कारण बन सकता है। 2020 में भी लोजपा के अलग चुनाव लड़ने से जद (यू) को नुकसान हुआ था, और यह अविश्वास अभी भी बरकरार है।

छोटे दल अक्सर गठबंधन में अपनी अनदेखी महसूस करते हैं और बेहतर सौदेबाजी के लिए दबाव डालते हैं। अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो वे अलग रास्ता अपना सकते हैं।

 केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा चिराग पासवान को अधिक सीटें दिए जाने की खबरों को खारिज करना और बाद में चिराग को 29 सीटें मिलना, आंतरिक मतभेदों को उजागर करता है।

केंद्रीय नेतृत्व, खासकर अमित शाह, ने सभी सहयोगी दलों को एकजुट रखने के लिए हस्तक्षेप किया है, ताकि चुनाव से पहले किसी भी तरह की दरार को रोका जा सके।

 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत नहीं मिला था, जिससे वह अपने सहयोगियों को नाराज करने का जोखिम नहीं ले सकती। एक मजबूत गठबंधन उसकी चुनावी सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

 जद (यू) ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की है, जबकि भाजपा ने इसे स्वीकार कर लिया है, जिससे गठबंधन में एक स्थिर नेतृत्व बना हुआ है।

जहां एनडीए ने सीट-बंटवारे का ऐलान कर दिया है, वहीं इंडिया गठबंधन में अभी भी देरी हो रही है। खासकर राजद और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर खींचतान जारी है।कां

ग्रेस 2020 में लड़ी गई 70 सीटों की मांग कर रही है, जबकि राजद उसे कम सीटें देना चाहती है। यह मतभेद गठबंधन को कमजोर कर सकता है।

मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) जैसी छोटी पार्टियों द्वारा अधिक सीटों की मांग भी चुनौती पेश कर रही है।

 तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने को लेकर गठबंधन के भीतर दुविधा है, खासकर उनके खिलाफ चल रहे आईआरसीटीसी मामले के बाद।

इंडिया गठबंधन का गठन मुख्य रूप से 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा का मुकाबला करने के लिए हुआ था। चूंकि लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, इसलिए राज्यों में यह गठबंधन अपने क्षेत्रीय लक्ष्यों के कारण कमजोर हो सकता है।

2024 के लोकसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे विपक्षी दलों में एक साथ रहने की उम्मीद जगी।

भाजपा को सत्ता में आने से रोकने का साझा लक्ष्य गठबंधन को एकजुट रख सकता है। बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य में हार का मतलब विपक्ष के लिए बड़ी हार होगी।

 कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, को राजद के साथ सीट-बंटवारे को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में बैठकों में शामिल होते देखा गया है, जो इस बात का संकेत है कि वे गठबंधन को बनाए रखने के लिए गंभीर हैं।