ट्रंप ने मिस्र में गाज़ा सीजफायर प्लान पर किए हस्ताक्षर, मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद
काहिरा/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच एक बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिस्र की राजधानी काहिरा में आयोजित एक विशेष शांति सम्मेलन के दौरान गाज़ा सीजफायर प्लान पर हस्ताक्षर किए हैं। इस ऐतिहासिक समझौते को क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही हिंसा और अस्थिरता को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ट्रंप ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा कि “अब समय आ गया है कि मध्य पूर्व शांति की राह पर लौटे। यह समझौता न केवल युद्ध को रोकने का प्रयास है, बल्कि मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के नए दौर की शुरुआत भी है।”
मिस्र की मध्यस्थता में हुए इस समझौते में कई देशों ने भाग लिया, जिनमें क़तर, सऊदी अरब, तुर्की और जॉर्डन शामिल हैं। इज़राइल और हमास दोनों के प्रतिनिधियों ने भी वार्ता में भाग लिया, हालांकि वे प्रत्यक्ष रूप से आमने-सामने नहीं हुए। सूत्रों के अनुसार, इस सीजफायर प्लान में 72 घंटे के युद्धविराम, बंधकों की अदला-बदली और मानवीय राहत मार्ग खोलने जैसे बिंदु शामिल हैं।
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने कहा कि यह समझौता गाज़ा में खूनखराबा रोकने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में एक अंतरराष्ट्रीय निगरानी दल तैनात किया जाएगा, जो सीजफायर की शर्तों पर नज़र रखेगा।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, “यह कदम न केवल गाज़ा बल्कि पूरे मध्य पूर्व में स्थिरता लाने की दिशा में सकारात्मक संकेत है।” उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे “धैर्य और संयम” बरतें और शांति प्रक्रिया को मजबूत करें।
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी ट्रंप की पहल की सराहना की और कहा कि “अगर यह समझौता टिकाऊ साबित होता है, तो यह मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया अध्याय होगा।” हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम उनके आगामी चुनावी अभियान के लिए भी राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है।
गाज़ा में बीते महीनों से जारी हिंसा ने हजारों नागरिकों की जान ले ली है और लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। ऐसे में यह सीजफायर प्लान युद्धग्रस्त लोगों के लिए राहत लेकर आया है।
अब पूरी दुनिया की नज़र इस बात पर टिकी है कि क्या यह समझौता वास्तव में गाज़ा में स्थायी शांति ला पाएगा या यह भी पहले की तरह कागज़ों तक सीमित रह जाएगा। फिलहाल, मिस्र में हस्ताक्षरित यह समझौता एक नई उम्मीद का प्रतीक बन चुका है — जहां से शायद मध्य पूर्व एक बार फिर शांति की ओर बढ़ सके।