पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर फिर हिंसक झड़प, दोनों ओर से भारी गोलीबारी
इस्लामाबाद/काबुल: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए हैं। दोनो देशों की सीमा (ड्यूरंड लाइन) पर बीते शनिवार देर रात हुई गोलीबारी में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की खबर है। बताया जा रहा है कि झड़प खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पास स्थित तोरखम बॉर्डर इलाके में हुई, जहां दोनों देशों की सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह झड़प तब शुरू हुई जब अफगान सीमा रक्षकों ने पाकिस्तान की ओर से की जा रही बाड़बंदी (fencing) पर आपत्ति जताई। पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि अफगानिस्तान की तरफ से पहले फायरिंग की गई, जिसके जवाब में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को कार्रवाई करनी पड़ी।
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता ने बताया कि “अफगान सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के गोलीबारी की, जिसमें हमारे दो सैनिक घायल हुए हैं। हमारी ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई।” वहीं, अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान पर “सीमा उल्लंघन” और “अनधिकृत निर्माण कार्य” का आरोप लगाया है।
झड़प के दौरान दोनों ओर से भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे सीमावर्ती गांवों में दहशत फैल गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई घंटे तक गोलियों और धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं। सीमा के दोनों ओर स्थित बाजारों और स्कूलों को सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सेनाओं के बीच इस तरह की झड़प हुई हो। बीते कुछ महीनों में ड्यूरंड लाइन पर कई बार गोलीबारी और झड़पों की घटनाएं हो चुकी हैं। दोनों देशों के बीच यह सीमा विवाद लंबे समय से तनाव का कारण रहा है। अफगानिस्तान ड्यूरंड लाइन को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानने से इनकार करता है, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी संप्रभु सीमा मानता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह ताजा झड़प दोनों देशों के रिश्तों में और कड़वाहट ला सकती है। पाकिस्तान ने हाल ही में अफगान नागरिकों के देश में प्रवेश पर कड़े नियम लागू किए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया है।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है। फिलहाल, सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।
यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह झड़पें एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप भी ले सकती हैं — ऐसा मानना है विशेषज्ञों का। दोनों देशों के बीच संवाद और भरोसे की कमी अब दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के लिए एक नई चुनौती बनती जा रही है।