भारत ने वायुसेना रैंकिंग में चीन को पछाड़ा: रणनीतिक क्षमता, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग बनी सफलता की कुंजी
भारत ने वायुसेना रैंकिंग में चीन को पछाड़ा: रणनीतिक क्षमता, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग बनी सफलता की कुंजी
नई दिल्ली — रक्षा क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ा मुकाम हासिल किया है। ग्लोबल एयर पॉवर इंडेक्स 2025 में भारत की वायुसेना (Indian Air Force) ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) को पछाड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर वायुसेना का स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब चीन के पास दुनिया का इकलौता 6th Generation Fighter Jet मौजूद है।
भारत की रणनीतिक मजबूती बनी अंतर
विश्लेषकों के अनुसार, भारत ने अपनी वायु शक्ति को न केवल तकनीकी स्तर पर, बल्कि रणनीतिक क्षमता, पायलटों की ट्रेनिंग, युद्ध तैयारियों और वास्तविक युद्ध अनुभव के आधार पर भी मजबूत बनाया है।
भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में सुखोई-30 MKI, राफेल, मिराज-2000, तेजस MK-1A और मिग-29 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान हैं। वहीं, स्वदेशी तकनीक से विकसित तेजस MK-1A और जल्द आने वाला AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) भारत की एयरोस्पेस क्षमता को नई ऊंचाई दे रहा है।
चीन का 6th Generation Jet, पर सीमित अनुभव
हालांकि चीन ने दुनिया का पहला 6th Generation Fighter Jet विकसित करने का दावा किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभी प्रायोगिक अवस्था (Experimental Stage) में है और उसके पास वास्तविक युद्ध का अनुभव नहीं है।
भारत की वायुसेना ने कई दशकों से विभिन्न भू-भागों — जैसे रेगिस्तान, पहाड़ी इलाकों और समुद्री सीमाओं — में ऑपरेशन चलाए हैं, जिससे उसके पायलटों और अधिकारियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ है।
राफेल और स्वदेशी तकनीक ने दिया बढ़त
भारत के पास मौजूद राफेल फाइटर जेट ने इस रैंकिंग में अहम भूमिका निभाई है। इसकी सुपर क्रूज़ क्षमता, लंबी दूरी की मिसाइलें और मल्टी-रोल प्रदर्शन ने भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को और मजबूत किया है।
इसके साथ ही, भारत के रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदम — जैसे HAL का तेजस प्रोजेक्ट, DRDO के मिसाइल सिस्टम और इंडिजिनस रडार सिस्टम्स — ने देश की वायुसेना को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया है।
मानव संसाधन और प्रशिक्षण बना निर्णायक पहलू
भारत की वायुसेना अपने अनुशासन, रणनीतिक सोच और तकनीकी प्रशिक्षण के लिए जानी जाती है। भारतीय पायलटों को कठिनतम परिस्थितियों में उड़ान भरने और मिशन संचालित करने की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है, जो उन्हें चीन की तुलना में बेहतर तैयार बनाती है।
रक्षा विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन तकनीकी रूप से आगे दिखने की कोशिश करता है, लेकिन उसकी वायुसेना अभी भी कम अनुभव वाली और केंद्रीकृत नियंत्रण प्रणाली पर निर्भर है। वहीं, भारत ने लोकतांत्रिक सैन्य संरचना के तहत लचीली और त्वरित निर्णय लेने वाली वायुसेना विकसित की है।
भारत की वायुसेना का यह प्रदर्शन न केवल देश की रक्षा शक्ति का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि स्वदेशी तकनीक, अनुभव और रणनीतिक योजना मिलकर किसी भी तकनीकी श्रेष्ठता को मात दे सकती है।
चीन के पास भले ही 6th Generation Fighter Jet हो, लेकिन भारत की असली ताकत उसके पायलटों, स्वदेशी नवाचार और युद्ध अनुभव में निहित है — यही कारण है कि आज भारत चीन से एक कदम आगे उड़ान भर रहा है।