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तेजस MK-1A की पहली उड़ान सफल: भारत की वायुसेना में आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

तेजस MK-1A की पहली उड़ान सफल: भारत की वायुसेना में आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

बेंगलुरु, 17 अक्टूबर — भारत की रक्षा तकनीक और स्वदेशी विनिर्माण के इतिहास में आज एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित तेजस MK-1A लड़ाकू विमान ने आज अपनी पहली सफल उड़ान भर ली। इस ऐतिहासिक अवसर का शुभारंभ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेंगलुरु में किया।

करीब 18 मिनट तक चली इस उड़ान के दौरान विमान ने अपने सभी तकनीकी मानकों पर खरा उतरते हुए सुरक्षित लैंडिंग की। यह उड़ान भारत के “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियानों की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

तेजस MK-1A को HAL ने भारतीय वायुसेना (IAF) की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया है। यह चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो हवा से हवा, और हवा से जमीन पर सटीक हमले की क्षमता रखता है।
MK-1A मॉडल में पुराने तेजस संस्करणों की तुलना में कई अत्याधुनिक सुधार किए गए हैं — जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, AESA रडार, मिड-एयर रिफ्यूलिंग क्षमता, और डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर HAL, DRDO और भारतीय वायुसेना को बधाई देते हुए कहा —

“तेजस MK-1A की पहली उड़ान भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह विमान आने वाले वर्षों में भारत की वायुसेना की रीढ़ बनेगा और हमारी सामरिक शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।”

भारतीय वायुसेना को मिलेगा बड़ा बल

भारतीय वायुसेना ने HAL से 83 तेजस MK-1A विमानों का ऑर्डर दिया है, जिसकी डिलीवरी अगले कुछ वर्षों में शुरू होगी। इन विमानों के शामिल होने से वायुसेना की रणनीतिक और तकनीकी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

तेजस MK-1A की सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है जो अपने लड़ाकू विमान स्वयं डिजाइन और निर्माण कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विमान आने वाले समय में निर्यात बाजार में भी भारत के लिए बड़ी संभावनाएं लेकर आएगा।

तेजस MK-1A की पहली उड़ान न केवल तकनीकी सफलता है बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता, वैज्ञानिक क्षमता और रक्षा सामर्थ्य का प्रतीक है। इस उड़ान के साथ भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह अब रक्षा तकनीक के क्षेत्र में किसी भी देश पर निर्भर नहीं, बल्कि अपने पंखों से नई ऊंचाइयों की उड़ान भरने को तैयार है।