राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत
एनडीए की प्रचंड जीत कई कारकों का परिणाम थी, न कि किसी एक कारक का:
नेतृत्व और सुशासन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यापक लोकप्रियता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन और विकास के एजेंडे पर मतदाताओं ने भरोसा जताया। पीएम मोदी ने अपने MY (महिला और युवा) फॉर्मूले पर जोर दिया, जिसे जनता का समर्थन मिला।
महिला मतदाताओं का निर्णायक समर्थन: इस चुनाव में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक मतदान किया (महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6% बनाम पुरुषों का 62.8%), और उनके वोट ने निर्णायक रूप से एनडीए की तरफ रुख किया। सरकार की महिला-केंद्रित कल्याणकारी योजनाएं, जैसे कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना, ने इस समर्थन को मजबूत किया।
प्रभावी गठबंधन और जातिगत समीकरण: एनडीए ने एक व्यापक जातिगत गठबंधन बनाया। भाजपा ने अपने पारंपरिक उच्च जाति के आधार को मजबूत किया, जबकि जदयू ने कुर्मी और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) पर पकड़ बनाए रखी। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने दलित वोटों को एनडीए के पक्ष में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे एक व्यापक सामाजिक आधार तैयार हुआ।
महागठबंधन की कमजोरियां: महागठबंधन, विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी, एक कमजोर कड़ी साबित हुई, जिसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा। सीट बंटवारे में असहमति और नेतृत्व की स्पष्टता की कमी ने भी उनकी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया।
वोट शेयर में बड़ी बढ़त: एनडीए ने लगभग 47.2% वोट शेयर हासिल किया, जबकि महागठबंधन को 37.3% वोट मिले, जो लगभग 10 प्रतिशत अंकों का अंतर था, जिसने सीटों की संख्या में भारी अंतर पैदा किया।