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107 सांसदों ने जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग नोटिस सौंपा; मदुरै मंदिर मामले के फैसले पर सियासी संग्राम तेज

नई दिल्ली, गुरुवार।
मदुरै के प्राचीन मंदिर से जुड़े विवाद पर आए हालिया फैसले को लेकर देश की राजनीति में भारी हलचल पैदा हो गई है। मद्रास हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ विपक्षी दलों के 107 सांसदों ने लोकसभा सचिवालय में महाभियोग का नोटिस जमा कराया है। यह कदम न्यायपालिका और राजनीति के बीच एक बड़ा टकराव खड़ा करने वाला माना जा रहा है।

सांसदों द्वारा जारी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि जस्टिस स्वामीनाथन ने “न्यायिक आचरण और नैतिक मानकों” का उल्लंघन किया है और उनके कुछ निर्णयों व टिप्पणियों की जांच आवश्यक है। विपक्ष का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में दिए गए कुछ फैसलों, विशेषकर मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों, में “गंभीर प्रक्रियागत प्रश्न” उठे हैं।

सत्ता पक्ष ने बताया न्यायपालिका पर हमला

सत्ता पक्ष ने इस नोटिस को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि विपक्ष न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। कई सांसदों ने इसे “न्याय व्यवस्था पर सीधा दबाव बनाने की कोशिश” तक करार दिया है।

संसद सचिवालय ने पुष्टि की

लोकसभा सचिवालय ने नोटिस प्राप्त होने की पुष्टि की है। नियमों के अनुसार, पहले इसकी प्रारंभिक जांच होगी कि प्रस्ताव महाभियोग की कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करता है या नहीं। इसके बाद ही स्पीकर यह तय करेंगे कि प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई शुरू हो या नहीं।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञ इस घटना को दुर्लभ और अत्यंत गंभीर बताते हैं। भारत के इतिहास में न्यायाधीशों के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया बहुत कम बार आरंभ हुई है और पूरी प्रक्रिया पूरी होना तो उससे भी दुर्लभ है। वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों के अनुसार:

महाभियोग की प्रक्रिया अत्यंत जटिल होती है,

आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच समिति बनाई जाती है,

और संसद में भारी बहुमत के बिना प्रस्ताव पारित होना लगभग असंभव होता है।

जस्टिस स्वामीनाथन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं

इस पूरे विवाद पर जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन की ओर से फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं तमिलनाडु के कुछ कानूनी संगठनों और वकीलों ने उनके समर्थन में बयान जारी किए हैं और इस कदम को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया है।

मदुरै मंदिर मामला फिर चर्चा में

महाभियोग नोटिस के बाद मदुरै मंदिर प्रशासन से जुड़े उस फैसले पर एक बार फिर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है, जिसे जस्टिस स्वामीनाथन ने सुनाया था। इस फैसले में मंदिर प्रशासन, सरकारी अधिकारों और धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता से संबंधित महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की गई थीं।